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गया जी के प्रमुख तीर्थ

पितरों की मुक्ति हेतु पवित्र तीर्थ स्थल

विष्णुपद मंदिर

विष्णुपद मंदिर

विष्णुपद मंदिर गया जी का सबसे प्रमुख और पवित्र मंदिर है। इस मंदिर में भगवान विष्णु के चरणों के अंकित चिह्न हैं, जिन्हें "विष्णुपद" कहा जाता है। यहाँ पिंडदान करने से पितरों की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

  • भगवान विष्णु के चरण चिह्न
  • पिंडदान का प्रमुख स्थल
  • प्राचीन वैदिक परंपरा
  • दैनिक पूजा एवं आरती

महत्व

विष्णुपद मंदिर में किया गया पिंडदान अक्षय फलदायी माना जाता है। यहाँ पितरों के नाम से दिया गया दान कभी नष्ट नहीं होता।

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फल्गु नदी

फल्गु नदी

फल्गु नदी गया जी की पवित्र नदी है। यहाँ तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस नदी में तर्पण करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है।

  • पवित्र तर्पण स्थल
  • अस्थि विसर्जन का प्रमुख स्थान
  • ब्रह्म कपिला तीर्थ
  • संध्या आरती एवं पूजा

महत्व

फल्गु नदी में तर्पण करने से सात पीढ़ियों के पितरों को तृप्ति मिलती है। यह नदी गंगा की तरह पवित्र मानी जाती है।

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अक्षयवट

अक्षयवट

अक्षयवट एक प्राचीन बरगद का वृक्ष है जो कभी नष्ट नहीं होता। इस वृक्ष के नीचे पिंडदान करने का विशेष महत्व है। माना जाता है कि यहाँ का पिंडदान अक्षय पुण्य देता है।

  • अक्षय पुण्य का प्रतीक
  • प्राचीन वट वृक्ष
  • पिंडदान का पवित्र स्थल
  • वैदिक परंपरा का केंद्र

महत्व

अक्षयवट के नीचे किया गया पिंडदान अक्षय फलदायी है। यहाँ पितरों के नाम से दिया गया दान कभी नष्ट नहीं होता।

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प्रेतशिला

प्रेतशिला

प्रेतशिला एक पवित्र पहाड़ी है जहाँ प्रेत यoni से मुक्ति हेतु पूजा की जाती है। यहाँ नारायण बली पूजा का विशेष महत्व है।

  • प्रेत मुक्ति का स्थल
  • नारायण बली पूजा का केंद्र
  • पितृ दोष निवारण
  • अकाल मृत्यु शांति

महत्व

प्रेतशिला पर नारायण बली पूजा करने से अकाल मृत्यु को प्राप्त आत्माओं को मुक्ति मिलती है और पितृ दोष का निवारण होता है।

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